• मध्यस्थता (Mediation) विवादों के वैकल्पिक समाधान (ADR) का एक और माध्यम है, जिसके द्वारा लोगों को उनके लंबित विवादों के निपटान हेतु सुविधा प्रदान की जाती है। न्यायालय उपयुक्त मामलों को मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) में भेजते हैं ताकि मध्यस्थता के माध्यम से उनका समाधान किया जा सके।
• हरियाणा के सभी जिलों/उपमंडलों में मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2025 में 37,015 मामले प्राप्त हुए, जिनमें से 3,448 मामलों का निपटारा मध्यस्थता एवं सुलह केंद्रों में किया गया। हरियाणा में कुल 628 प्रशिक्षित मध्यस्थ उपलब्ध हैं, जिनमें न्यायाधीश, सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी तथा अधिवक्ता शामिल हैं।
• हरियाणा के सभी 22 जिलों में पूर्व-विवाद (Pre-Litigation) डेस्क/क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। पुलिस थानों/महिला प्रकोष्ठों द्वारा वैवाहिक विवादों के मामलों को इन डेस्क/क्लीनिक में भेजा जाता है, ताकि पूर्व-विवाद स्तर पर ही समाधान की संभावना तलाश की जा सके। वर्ष 2025 में 5,745 मामले प्राप्त हुए, जिनमें से 1,424 मामलों का निपटारा पूर्व-विवाद डेस्क/क्लीनिक के माध्यम से किया गया।
• वाणिज्यिक न्यायालयों से संबंधित पूर्व-संस्थागत मध्यस्थता एवं समाधान (Pre-Institution Mediation and Settlement – PIMS) के मामलों का निपटारा हरियाणा के संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा, वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 तथा वाणिज्यिक न्यायालय (पूर्व-संस्थागत मध्यस्थता एवं समाधान) नियम, 2018 के अनुसार किया जा रहा है।